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मनमोहन आर्य 

संसार को ईश्वर की सत्ता का परिचय सर्वप्रथम वेदों से मिला है”

संसार को ईश्वर की सत्ता का परिचय सर्वप्रथम वेदों से मिला...

संसार को ईश्वर की सत्ता का परिचय सर्वप्रथम वेदों से मिला है”

मनुष्य का आत्मा ही ईश्वर प्राप्ति व प्रार्थनाओं की पूर्ति का धाम है”

मनुष्य का आत्मा ही ईश्वर प्राप्ति व प्रार्थनाओं की पूर्ति...

मनुष्य का आत्मा ही ईश्वर प्राप्ति व प्रार्थनाओं की पूर्ति का धाम है”

“पृथिवी आदि लोकों का आकाश में भ्रमण का सिद्धान्त वेदों की देन है”

“पृथिवी आदि लोकों का आकाश में भ्रमण का सिद्धान्त वेदों...

“पृथिवी आदि लोकों का आकाश में भ्रमण का सिद्धान्त वेदों की देन है”

“ईश्वर एक सच्चिदानन्दस्वरूप, सर्वव्यापक तथा सर्वान्तर्यामी सत्ता है”

“ईश्वर एक सच्चिदानन्दस्वरूप, सर्वव्यापक तथा सर्वान्तर्यामी...

“ईश्वर एक सच्चिदानन्दस्वरूप, सर्वव्यापक तथा सर्वान्तर्यामी सत्ता है”“0

icon “देवयज्ञ अग्निहोत्र करने से मनुष्य पाप से मुक्त व सुखों से युक्त होते हैं”

“देवयज्ञ अग्निहोत्र करने से मनुष्य पाप से मुक्त व सुखों...

“देवयज्ञ अग्निहोत्र करने से मनुष्य पाप से मुक्त व सुखों से युक्त होते हैं”

‘वेद के सिद्धान्तों एवं मान्यताओं का प्रचारक प्रमुख ग्रन्थ सत्यार्थप्रकाश’

‘वेद के सिद्धान्तों एवं मान्यताओं का प्रचारक प्रमुख ग्रन्थ...

‘वेद के सिद्धान्तों एवं मान्यताओं का प्रचारक प्रमुख ग्रन्थ सत्यार्थप्रकाश’

‘वेदों के प्रचार से अविद्या दूर होने सहित विद्या की प्राप्ति होती है’

‘वेदों के प्रचार से अविद्या दूर होने सहित विद्या की प्राप्ति...

‘वेदों के प्रचार से अविद्या दूर होने सहित विद्या की प्राप्ति होती है’

मनुष्य को अपने सभी शुभ व अशुभ कर्मों का फल भोगना पड़ता है”

मनुष्य को अपने सभी शुभ व अशुभ कर्मों का फल भोगना पड़ता है”

मनुष्य को अपने सभी शुभ व अशुभ कर्मों का फल भोगना पड़ता है”

“हमारा यह संसार इससे पहले अनन्त बार बना व नष्ट हुआ है”

“हमारा यह संसार इससे पहले अनन्त बार बना व नष्ट हुआ है”

“हमारा यह संसार इससे पहले अनन्त बार बना व नष्ट हुआ है”

“ईश्वर की उपासना से उपासक को ज्ञान व ऐश्वर्य प्राप्त होते हैं”

“ईश्वर की उपासना से उपासक को ज्ञान व ऐश्वर्य प्राप्त होते...

“ईश्वर की उपासना से उपासक को ज्ञान व ऐश्वर्य प्राप्त होते हैं”

‘ईश्वर, वेद और ऋषि दयानन्द के सच्चे अनुयायी स्वामी श्रद्धानन्द’

‘ईश्वर, वेद और ऋषि दयानन्द के सच्चे अनुयायी स्वामी श्रद्धानन्द’

‘ईश्वर, वेद और ऋषि दयानन्द के सच्चे अनुयायी स्वामी श्रद्धानन्द’

वेदज्ञान सृष्टि में विद्यमान ज्ञान के सर्वथा अनुकूल एवं पूरक है”

वेदज्ञान सृष्टि में विद्यमान ज्ञान के सर्वथा अनुकूल एवं...

वेदज्ञान सृष्टि में विद्यमान ज्ञान के सर्वथा अनुकूल एवं पूरक है”

“ईश्वर के सत्यस्वरूप को जानकर उसकी आज्ञाओं का पालन ही धर्म है”

“ईश्वर के सत्यस्वरूप को जानकर उसकी आज्ञाओं का पालन ही धर्म...

“ईश्वर के सत्यस्वरूप को जानकर उसकी आज्ञाओं का पालन ही धर्म है”

“आर्यसमाज ही ईश्वर प्रवृत्त ज्ञान चार वेदों का प्रतिनिधि व प्रचारक  

“आर्यसमाज ही ईश्वर प्रवृत्त ज्ञान चार वेदों का प्रतिनिधि...

“आर्यसमाज ही ईश्वर प्रवृत्त ज्ञान चार वेदों का प्रतिनिधि व प्रचारक